Tuesday, November 10, 2009
क्या इस वृद्धा के लिए कभी गुड टाइम्स आएगा??
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जैसा मैंने महसूस किया, लिख दिया, गलतियाँ स्वाभाविक हैं, मानव हूँ, वर्ण व्यवस्था के आखिरी सोपान पर, लेकिन द्वेष नहीं है, हिन्दू हूँ, नास्तिक हूँ, लेकिन कोई मुझे इस बात के लिए प्रताड़ित करे (चाहे वह मानसिक ही क्यों न हो) सहन नहीं करता. मैं sympathy की बात नहीं करता, मैं empathy की बात करता हूँ. दिक्कत मुझे तब होती है, जब बराबरी का पैमाना सब के लिए अलग- अलग होता है. लेकिन कुछ भी पढ़ने से पहले इसे अवश्य पढें
4 comments:
goot time aaye na aaye .... aise bojha uthaaye iski kamar jaroor toot jaayegi umr beetne ke saath ...
कभी नहीं इनके लिये तो सपना ही रहेगा शुभकामनायें कुछ दिनों खैऎ अनुपस्थिती के लिये क्षमा चाहती हूँ
कभी नही, लेकिन यह महिला अपना किमती वोट दे कर इन नेताओ को गुड टाइम्स जरुर देगी
यही तो विडम्बना है!
वृद्ध होना स्व्यं में एक अभिशाप है!
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