Sunday, November 8, 2009
जिंदगी यूँ भी बसर होती है
ये भी भारत का नागरिक (वोटर है) जो डलाव से प्लास्टिक और लोहा बीनकर जीवन यापन करने की कोशिश कर रहा है. क्या इस नागरिक तक भारत के संविधान में दी हुई तमाम गारंटियां और पार्टियों द्वारा दिखाये गये सपने पहुंच पायेंगे? या फिर हर हाथ को काम की यही मूर्त अभिधारणा है??
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5 comments:
manmohan sahab ki sarkar ko chahiye ki ab samvidhan ki prastavana se 'Samajwadi'shabd ko 'bazarwadi/udarwadi'shabd se replace karwalen
orkut ब्लॉग की sidebar में
श्रीमती के नाम ghazal
manmohan sahab ki sarkar ko chahiye ki ab samvidhan ki prastavana se 'Samajwadi'shabd ko 'bazarwadi/udarwadi'shabd se replace karwalen
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श्रीमती के नाम ghazal
हर हाथ को काम की यही मूर्त अभिधारणा है?
kya kahun.
इस बेचारे नागरिक को कोन देखे गा, कोन इस की फ़िक्र करेगा..... पहले इन नेतओ का पेट तोभर जाये
चन्द शब्दों में सभी कुछ तो कह दिया आपने!
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